मेरा विश्वास है कि जीवन में सबसे ज्यादा दर्द परमेश्वर के कारण होता है

अगर वह ब्रह्मांड की परम शक्ति है

तो यकीनन सारे दर्द के लिए वही ज़िम्मेदार है

यह कैसे सच हो सकता है अगर हम यह भी देखें कि परमेश्वर दयालु है, सुंदरता, प्रेम और आनंद का स्रोत है?

अगर हमने उन चीजों के आधार पर निष्कर्ष निकाला है जिन्हें हमने देखा है और जो हमें सिखाया गया है और यह पता चलता है कि यह सच नहीं है, तो क्या होगा?

आओ हम हजारों साल पीछे चलें, जब ब्रह्मांड का परमेश्वर अपने विषय में बताता है …

यहोवा उसके सामने होकर यों प्रचार करता हुआ चला, “ यहोवा, यहोवा, ईश्‍वर दयालु और अनुग्रहकारी, कोप करने में धीरजवन्त, और अति करुणामय और सत्य, हज़ारों पीढ़ियों तक निरन्तर करुणा करनेवाला, अधर्म और अपराध और पाप का क्षमा करनेवाला है

निर्गमन 34:6-7

परमेश्वर कैसा है ?

दयालु

अनुग्रहकारी

प्रेमी

विश्वासयोग्य

क्षमा करने वाला

ये ऐसे गुण हैं जिन्हें परमेश्वर ने अपने आप को हमसे परिचित करने के लिए चुना हैं । लेकिन, इस का अर्थ यह नहीं कि वह पाप और बलवे को हल्के में लेता है । और वह न्याय को भी अनदेखा नहीं करता है । वह बुराई का अंत कर सकता है और जरुर करेगा ।

तुम जानते हो कि वह इसलिये प्रगट हुआ कि पापों को हर ले जाए; और उसके स्वभाव में पाप नहीं

1 यूहन्ना 3 :5

समस्या

समस्या यह है, हम सभी ने विद्रोह किया है और हमारे हृदय में पाप है । पाप ऐसा कुछ है जो हम कहते, सोचते या करते हैं जो परमेश्वर को प्रसन्न नहीं करता है, और हमारे पाप हमें परमेश्वर से अलग करते हैं । हमारे जीवन में जो दर्द हम अनुभव करते हैं वह इस पाप और अलगाव के कारण होता है ।

लेकिन एक अच्छी ख़बर भी है ।

जो प्रेम परमेश्वर हम से रखता है, वह इस से प्रगट हुआ, कि परमेश्वर ने अपने एकलौते पुत्र को जगत में भेजा है, कि हम उसके द्वारा जीवन पाएं प्रेम इस में नहीं कि हम ने परमेश्वर ने प्रेम किया; पर इस में है, कि उस ने हम से प्रेम किया; और हमारे पापों के प्रायश्चित्त के लिये अपने पुत्र को भेजा

1 यूहन्ना 4 :9-10

यीशु एकमात्र सच्चे और जीवित परमेश्वर का पुत्र है उसने पाप रहित जीवन बिताया और फिर उसने हमारे पापों के दंड का भुगतान करने के लिए क्रूस पर मर कर अपना जीवन बलिदान कर दिया, ताकि हमें क्षमा किया जा सके

 

परमेश्वर की सामर्थ्य से, खुद मृत्यु को हराते हुए, यीशु को मरे हुओं में से जी उठाया गया और हमें उसके साथ अनन्त जीवन में जीने का अवसर दिया गया है यदि हम केवल उसे हमारे उद्धारकर्ता के रूप में स्वीकार करेंगे और उस पर भरोसा करेंगे

तो इन सबका क्या मतलब है?

परमेश्वर के चरित्र और स्वभाव का यह प्रकाशन, जो पाप को क्षमा करने की इच्छा रखता हैऔर इसका न्याय भी करता है, इसका उदाहरण हमारी आँखों के सामने यीशु का जीवन है, जो हमारे पापों के लिए भुगतान करने और सभी बुराई को हराने के लिए मर गया

परमेश्वर को सभी पीड़ाओं के स्रोत के रूप में पहचानने के बजाय, हम इस सच्चाई से सामना करते हैं कि यह परमेश्वर ही है जो सभी आनंद, शांति और प्रेम का स्रोत है

क्योंकि यीशु हमारे विद्रोह के लिए भुगतान बन गया, हम इस जीवन में अब परमेश्वर के प्रेम और दया का अनुभव कर सकते हैं, और हम उसके साथ अनन्त जीवन की आशा कर सकते हैं

यदि आप यीशु को अपने उद्धारकर्ता और प्रभु के रूप में विश्वास करने के लिए तैयार हैं, तो आपको केवल उसके पास आना है और उससे बातें करनी है आप कुछ इस तरह प्रार्थना कर सकते हैं:

“प्रिय परमेश्वर, मुझसे प्यार करने के लिए धन्यवाद मुझे एहसास है कि मेरे जीवन में ऐसे विचार, शब्द और कार्य हैं जो आपको प्रसन्न नहीं हैं, लेकिन मेरा मानना है कि यीशु मसीह मेरे स्थान पर मेरे पाप को माफ करने के लिए मर गए ताकि मैं आपको व्यक्तिगत रूप से जान सकूं मैं अपना हृदय खोलता हूँ और आपको मेरे अन्दर रहने के लिए प्रार्थना करता हूँ, जिससे मैं एक ऐसा जीवन जीऊँ जो आपको प्रसन्न करता हो मैं केवल एकमात्र सच्चे, जीवित परमेश्वर के रूप में आपकी आराधना करने का वचन देता हूं आपके प्रेम, आपके माफी और इस जीवन के समाप्त होने के बाद आपके साथ अनन्त जीवन बिताने के आपके वादे के लिए धन्यवाद यीशु के नाम से, मैं प्रार्थना करता हूं आमीन

क्या आपने आज यह प्रार्थना की है ?

क्या आप अपने क्षेत्र में से किसी के साथ जुड़ना चाहते हैं ?