मेरा विश्वास है कि जीवन में सबसे ज्यादा दर्द लोगों के कारण होता है

यदि आप प्रमुख खबरों, या यहां तक कि अपने स्वयं के जीवन में दिल की पीड़ा को देखते हैं

तो कोई न कोई तो इसके लिए ज़िम्मेदार होना चाहिए

क्या हो यदि किसी व्यक्ति पर दोष लगाना केवल बीमारी का पता लगाने की बजाय केवल लक्षण को देखना हो?

क्या यह संभव है कि हर दर्द के पीछे कोई एक गहरा कारण होता है?

अच्छाई या बुराई

क्या यह संभव है कि आज जो – चोट, नफरत, मृत्यु, संघर्ष – हम देख रहे हैं, यह सब जिसे परमेश्वर ने अच्छा बनाया है उसके विरूद्ध एक लंबे समय से चल रही बुराई के युद्ध का एक हिस्सा है?

परमेश्वर ने पुरुष और स्त्री की सृष्टि की और वहाँ कोई पीड़ा या मृत्यु नहीं थी ।

तब परमेश्वर ने जो कुछ बनाया था, सब को देखा, तो क्या देखा, कि वह बहुत ही अच्छा है ।

उत्पत्ति 1:31

प्रथम मनुष्य शैतान के प्रलोभन के सामने हार गए, जो सारे संसार का भरमाने वाला है ।
प्रकाशितवाक्य 12:9

उन्होंने अपने सृष्टिकर्त्ता पर भरोसा करने के बजाय परमेश्वर के प्रति विद्रोह का कार्य किया । इस कारण बुराई, दर्द और मृत्यु ने दुनिया में प्रवेश किया ।
उत्पत्ति 3:1-7

इस के बाद प्रत्येक व्यक्ति ने भी पाप किया ।
इफिसियों 2:3; रोमियों 5:12

लेकिन परमेश्वर ने हमें अपने पाप का कैदी नहीं छोड़ा उसने पाप और मृत्यु को हराने और परमेश्वर के साथ हमारा मेलमिलाप कराने के लिए यीशु मसीह को भेजा

क्योंकि जब एक मनुष्य के अपराध से बहुत लोग मरे, तो परमेश्वर का अनुग्रह और उसका जो दान एक मनुष्य के, अर्थात यीशु मसीह के अनुग्रह से हुआ बहुतेरे लोगों पर अवश्य ही अधिकाई से हुआ

रोमियों 5:15

तो इन सबका क्या मतलब है?

यह कहना कि बुरे लोग हमारे दर्द का कारण है यह तो समस्या को सरल बनाना है यदि हम अपने आप को बड़े ध्यान से और ईमानदारी से जांचते हैं, तो हम महसूस करेंगे कि भले ही हम खुद को अच्छे लोग मानते हैं लेकिन हमने खुद को और अपने आस-पास के लोगों द्वारा अनुभव किए गए दर्द में भी योगदान दिया है

यदि यह सत्य है कि परमेश्वर ने पहले से ही दुख को खुशी में बदलने और मृत्यु को हराने और जीवन को हमेशा के लिए स्थापित करने की योजना बनायी थी, तो क्या होगा? क्या आप परमेश्वर की इस योजना का हिस्सा नहीं बनना चाहेंगे ? केवल यीशु में ही हमारे पाप के दर्दनाक परिणामों से अंतिम मुक्ति का वादा है

क्या आप अपने क्षेत्र में से किसी के साथ जुड़ना चाहते हैं ?